भारत में लोकतंत्र की आत्मा जनता के मताधिकार में निहित है। चुनाव सिर्फ सरकार बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि आम आदमी की आवाज़ को सामने लाने का अवसर है। इसी मताधिकार की रक्षा और लोकतंत्र को मज़बूत बनाने के उद्देश्य से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार के सासाराम से अपनी ‘वोट अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की।
यात्रा की पृष्ठभूमि:
यह यात्रा विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित की गई है, ताकि मतदाताओं को जागरूक किया जा सके और उन्हें बताया जा सके कि उनका वोट लोकतंत्र का सबसे बड़ा हथियार है। राहुल गांधी ने इसे सिर्फ राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा की लड़ाई बताया है। इस अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव सहित INDIA गठबंधन के अन्य नेता भी मौजूद रहे।
यात्रा का महत्व:
लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी और 16 दिनों की यह यात्रा बिहार के 20 से अधिक जिलों से गुजरेगी। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का दावा है कि यह यात्रा दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति सजग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यात्रा का समापन पटना के गांधी मैदान में होने वाली एक विशाल रैली के साथ होगा।
हेलीपैड विवाद:
यात्रा की शुरुआत से पहले प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर विवाद भी सामने आया। राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड निर्माण कार्य अंतिम समय में इतना जल्दबाजी में किया गया कि रात में बुलेट बाइक की हेडलाइट की रोशनी में इसे पूरा करना पड़ा। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए।
