रायपुर: प्रदेश में बने छोटे-बड़े बांध और जलाशय अब अपनी मूल क्षमता के मुकाबले काफी कम पानी रोक पा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है गाद (सिल्ट) का जमाव। बारिश के साथ बहकर आने वाली मिट्टी, रेत और पत्थर साल-दर-साल जलाशयों में इकट्ठा होते रहे हैं। परिणामस्वरूप—
- जल भंडारण क्षमता घट गई है।
- बाढ़ के समय बांधों पर दबाव बढ़ जाता है।
- सिंचाई और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है।
इसी संकट को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गाद निकासी का मास्टर प्लान तैयार किया है।
क्या होगी योजना
1. दर्जनों बांधों की गाद का सर्वे – सबसे पहले हर जिले के प्रमुख बांधों की क्षमता का आकलन किया जाएगा।
2. द्रेजिंग तकनीक – पानी में काम करने वाली ड्रेजिंग मशीनों से गाद निकाली जाएगी।
3. गाद का सुरक्षित निपटान – गाद को सीधे खेतों, खाली भूमि और पर्यावरण स्वीकृत स्थलों पर डाला जाएगा ताकि यह उपयोगी भी बने और प्रदूषण भी न फैले।
4. विशेष निगरानी दल – हर प्रोजेक्ट पर इंजीनियर और स्थानीय प्रशासन की टीम निगरानी रखेगी।
देशभर में ऐसे चल रहे हैं प्रयास
तमिलनाडु: Pillur Dam से लगभग 26 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद हटाने की योजना चल रही है। इसके निपटान के लिए 100 एकड़ से ज्यादा भूमि चिन्हित की गई है।
केरल: Aruvikkara Reservoir से अब तक 7 हजार टन गाद हटाई जा चुकी है। आने वाले महीनों में 93 हजार टन और हटाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे राज्य की जल आपूर्ति बेहतर होगी।
विशेषज्ञों की राय
- गाद निकासी से जल संग्रहण क्षमता 20-30% तक बढ़ सकती है।
- सिंचाई और पीने के पानी के संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
- बांधों के टूटने या बाढ़ की आशंका भी कम होगी।
