छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को स्पष्ट अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा है कि वे दिसंबर 2025 तक जांच पूरी करें और फाइनल रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
यह आदेश उस समय आया जब मामले से जुड़ी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित थीं और जांच की धीमी गति पर सवाल उठाए जा रहे थे
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला अब बहुत लंबा खिंच चुका है और बार-बार की देरी से जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ रहे हैं। अदालत ने कहा — “अब कोई नई तारीख नहीं मिलेगी। दिसंबर तक जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करें।”
यह टिप्पणी साफ संकेत है कि सर्वोच्च न्यायालय इस घोटाले को जल्द अंजाम तक पहुंचाना चाहता है।
30 आबकारी अधिकारियों से चल रही पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, ED और EOW की टीमें वर्तमान में 30 आबकारी अधिकारियों से पूछताछ कर रही हैं, जिनमें कई पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने शराब ठेकों की नीतियों में गड़बड़ी कर करोड़ों रुपये के कमीशन के बदले लाइसेंस दिलवाए।
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के बाद घोटाले की पूरी परतें खुल जाएंगी और सभी वित्तीय लेनदेन का ट्रैक तैयार किया जा सकेगा।
कहां से शुरू हुआ घोटाला
यह पूरा मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब आरोप लगे कि राज्य में शराब बिक्री से होने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा निजी ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से गायब हो गया।
ED की रिपोर्ट के अनुसार, यह घोटाला 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। इसमें आबकारी विभाग के साथ-साथ कुछ प्रभावशाली कारोबारी और राजनीतिक लोगों के नाम भी सामने आए हैं।
गिरफ्तारियां और कानूनी मोर्चा
अब तक ED और EOW कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं, जिनमें कारोबारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट और विभागीय अधिकारी शामिल हैं। हाल ही में कोर्ट ने भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले कारोबारी अनवर ढेबर को कुछ दिनों की अंतरिम राहत दी है, जबकि अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की गई हैं।
