बिहार की राजनीति में टिकट बंटवारे को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की पहली उम्मीदवार सूची जारी होने के बाद पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पटना स्थित राबड़ी आवास के बाहर शनिवार को एक नेता ने सार्वजनिक रूप से अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने टिकट न मिलने पर अपना कुर्ता फाड़ लिया और भावुक होकर जोर-जोर से रोने लगे।
इस नेता ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि टिकट के बदले उनसे ₹ 2.70 करोड़ की मांग की गई थी। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया, हर चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन पैसे के खेल में उनकी उपेक्षा की गई। टिकट की दौड़ से बाहर होने के बाद उन्होंने राबड़ी आवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की।
घटना ने न केवल पार्टी के भीतर की खींचतान को उजागर किया है, बल्कि टिकट बंटवारे की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरजेडी की पहली सूची में 52 उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए हैं, जिससे कई दावेदारों में नाराजगी है। सूत्रों के अनुसार, कई और नेता भी पार्टी के फैसले से असंतुष्ट हैं और आने वाले दिनों में और विरोध देखने को मिल सकता है।
इस पूरे प्रकरण ने चुनावी माहौल में राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टिकट बंटवारे में असंतोष का यह दौर पार्टी की एकता और चुनावी रणनीति को कमजोर कर सकता है। साथ ही विपक्षी दल भी इस विवाद को भुनाने की तैयारी में हैं।
घटना इस बात का संकेत भी देती है कि चुनावी टिकट अब केवल राजनीतिक कार्य और समर्पण पर नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत और अंदरूनी लॉबिंग पर भी निर्भर होता जा रहा है। आरजेडी के लिए यह चुनौती है कि वह असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को कैसे मनाती है और अपनी छवि को कैसे संभालती है।
