छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की दो प्रतिष्ठित सांस्कृतिक विभूतियों—लोककलाकार तीजन बाई और वरिष्ठ कवि-साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल—से फोन पर बात की। यह संवाद केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की उस संवेदनशीलता का प्रतीक था, जो देश की सांस्कृतिक आत्मा को सम्मान देती है।
पंडवानी की अद्भुत प्रस्तोता तीजन बाई से प्रधानमंत्री ने उनके स्वास्थ्य और कुशल-क्षेम की जानकारी ली। उन्होंने आत्मीय स्वर में कहा कि यदि किसी भी तरह की जरूरत हो, तो वे सीधे संपर्क करें। यह बात सुनकर तीजन बाई ने प्रधानमंत्री को आभार व्यक्त किया और बताया कि वह स्वस्थ हैं और प्रदेश की संस्कृति को आगे बढ़ाने में निरंतर जुटी हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध कवि विनोद कुमार शुक्ल का भी हालचाल जाना। उनकी साहित्यिक सेवाओं की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि देश की असली पहचान उसके रचनाकारों और कलाकारों से बनती है। यह संवाद छत्तीसगढ़ के उन लाखों नागरिकों के लिए प्रेरणा का क्षण था, जो अपनी जड़ों और परंपराओं से गहरा जुड़ाव रखते हैं।
स्थापना दिवस पर जब पूरा राज्य विकास और उपलब्धियों का उत्सव मना रहा था, तब प्रधानमंत्री का यह व्यक्तिगत जुड़ाव एक अलग ही संदेश दे गया। यह याद दिलाता है कि आधुनिक भारत के निर्माण में संवेदनशीलता और संस्कृति की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी विकास और तकनीकी प्रगति की।
छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से कला, लोककथाओं और जनसंस्कृति की जीवंत मिसाल रही है। प्रधानमंत्री का यह संवाद उस विरासत के प्रति आदर और लगाव का प्रतीक बन गया—यह दर्शाता है कि भारत की आत्मा आज भी अपने कलाकारों की धड़कनों में बसती है।
