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October 20, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का पहला जू प्राइवेट हाथों में जाने की तैयारी, भिलाई का मैत्री बाग होगा पूरी तरह आउटसोर्स

भिलाई स्टील प्लांट द्वारा संचालित ऐतिहासिक मैत्री बाग जू को निजी एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया तेज हो गई है। बीएसपी प्रबंधन ने जू संचालन के लिए इच्छुक कंपनियों से EOI (Expression of Interest) मंगाए हैं। लगभग 60 वर्ष पुराने इस जू को पहली बार पूर्ण रूप से आउटसोर्स करने की तैयारी है।

मैत्री बाग में हर वर्ष करीब 12 लाख पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन इसके बावजूद जू को होने वाला खर्च आय से कई गुना अधिक बताया जाता है। बीएसपी प्रबंधन के अनुसार, जू संचालन पर हर साल लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि टिकटों और अन्य स्रोतों से कुल आय केवल 1.5 करोड़ रुपये ही होती है। इस तरह करीब ढाई करोड़ रुपये का घाटा प्रतिवर्ष उठाना पड़ रहा है। यही कारण है कि जू संचालन को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया गया है।

वर्तमान में मैत्री बाग में बोटिंग, गार्डन व पार्किंग जैसी सुविधाएं पहले से ही ठेके पर संचालित हो रही हैं। लेकिन पहली बार पूरा जू एक साथ निजी एजेंसी को दिया जा रहा है। निजी एजेंसी के आने के बाद जहां आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं टिकट दरों में बढ़ोतरी होने की संभावना से पर्यटकों की जेब पर असर पड़ सकता है।

मैत्री बाग देश में सफेद बाघ संरक्षण के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहां अब तक 19 सफेद बाघों का जन्म हुआ है, जिनमें से 13 सफेद बाघों को देश के अलग-अलग राज्यों जैसे राजकोट, कानपुर, बोकारो, इंदौर, मुजफ्फरपुर और रायपुर भेजा जा चुका है। वर्तमान में यहां 6 सफेद बाघ मौजूद हैं। देश में कुल लगभग 160 सफेद बाघों में से 19 अकेले मैत्री बाग से संबंधित हैं।

मैत्री बाग की शुरुआत वर्ष 1965 में एक गार्डन के रूप में हुई थी, और वर्ष 1972 में इसे आधिकारिक रूप से जू का दर्जा दिया गया था। लगभग 140 एकड़ में फैला यह परिसर आज 5 श्रेणियों के करीब 400 वन्य जीवों का घर है और बोटिंग, टॉय ट्रेन, गार्डन, म्यूजिकल फाउंटेन सहित कई मनोरंजन सुविधाओं से लैस है।

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