छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के चकरभाठा में हर वर्ष आयोजित होने वाले चालीहा महोत्सव में देशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और तीर्थस्थल पर होने वाले आयोजन को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने 30 और 31 दिसंबर को कुल 12 ट्रेनों को अस्थायी स्टॉपेज देने का निर्णय लिया है।
रेलवे का उद्देश्य महोत्सव में पहुंचने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधा देना है, क्योंकि इन दो दिनों में ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
चकरभाठा स्टेशन पर अस्थायी ठहराव पाने वाली ट्रेनें (30–31 दिसंबर)
1. ट्रेन संख्या 18239
कोरबा–नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी शिवनाथ एक्सप्रेस
- आगमन: 21:06 बजे
- प्रस्थान: 21:08 बजे
2. ट्रेन संख्या 18240
नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी–कोरबा शिवनाथ एक्सप्रेस
- आगमन: 06:39 बजे
- प्रस्थान: 06:41 बजे
3. ट्रेन संख्या 18237
कोरबा–अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस
- आगमन: 14:34 बजे
- प्रस्थान: 14:36 बजे
4. ट्रेन संख्या 18238
अमृतसर–बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस
- आगमन: 10:19 बजे
- प्रस्थान: 10:21 बजे
5. ट्रेन संख्या 13288
आरा–दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस
- आगमन: 18:02 बजे
- प्रस्थान: 18:04 बजे
6. ट्रेन संख्या 13287
दुर्ग–आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस
- आगमन: 09:14 बजे
- प्रस्थान: 09:16 बजे
7. ट्रेन संख्या 18517
कोरबा–विशाखापट्टनम लिंक एक्सप्रेस
- आगमन: 18:27 बजे
- प्रस्थान: 18:29 बजे
8. ट्रेन संख्या 18518
विशाखापट्टनम–कोरबा लिंक एक्सप्रेस
- आगमन: 08:43 बजे
- प्रस्थान: 08:45 बजे
9. ट्रेन संख्या 12855
बिलासपुर–नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी इंटरसिटी एक्सप्रेस
- आगमन: 15:36 बजे
- प्रस्थान: 15:38 बजे
10. ट्रेन संख्या 12856
नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी–बिलासपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस
- आगमन: 14:00 बजे
- प्रस्थान: 14:02 बजे
11. ट्रेन संख्या 12853
दुर्ग–भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस
- आगमन: 20:40 बजे
- प्रस्थान: 20:42 बजे
12. ट्रेन संख्या 12854
भोपाल–दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस
- आगमन: 05:25 बजे
- प्रस्थान: 05:27 बजे
चालीहा महोत्सव: 40 दिनों तक चलने वाला धार्मिक आयोजन
पिछले 21 साल से चकरभाठा में चालीहा महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
इसकी शुरुआत 30 दिसंबर को सुबह 10 बजे ईष्ट देव झूलेलाल की पूजा-अर्चना के साथ होगी। आगामी 40 दिनों तक अखंड दिव्य ज्योत के प्रज्ज्वलन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
देशभर से सिंधी समाज के संत और विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं, जिसके कारण यहां भारी भीड़ रहती है।
