April 19, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के ‘मुन्‍नाभाई MBBS’ पकड़े गए: 15 साल से कर रहे थे करोड़ों की ठगी, फर्जी वारंट दिखाकर युवकों से वसूली

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले में पुलिस ने दो ऐसे मेडिकल स्टूडेंट्स को गिरफ्तार किया है जो पिछले 15 सालों से अलग-अलग तरीकों से करोड़ों की ठगी कर रहे थे। दोनों आरोपी— चंद्रशेखर सेन उर्फ चंदन सेन (40) और निखिल राज सिंह (37)— पहले मेडिकल कॉलेज के छात्र रहे हैं, लेकिन पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फर्जीवाड़े का रास्ता अपना लिया।

मामला कैसे खुला

गरियाबंद जिले के रहने वाले खेमचंद को अगस्त 2025 में डाक से एक फर्जी नॉन-बेलबल वारंट मिला। आरोपी निखिल राज ने फोन पर उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी देते हुए ₹2 लाख की मांग की। डरकर पीड़ित ने अगस्त 2025 में ही ₹1 लाख दे दिया।

इसके बाद भी आरोपियों ने उसे लगातार धमकाते हुए वसूली जारी रखी। परेशान होकर खेमचंद ने छुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और दोनों आरोपियों तक पहुंच गई

गिरफ्तारी ऐसे हुई

पुलिस टीम ने पहले कनसिंधी निवासी चंद्रशेखर सेन को पकड़ा। पूछताछ में उसने बताया कि उसका साथी निखिल राज ट्रेन से यूपी भागने की कोशिश कर रहा है।

लोकेशन ट्रैक कर RPF बिलासपुर और पेंड्रा रोड की मदद से निखिल को भी हिरासत में ले लिया गया।

भोले-भाले लोगों को फँसाते थे

पूछताछ में दोनों ने आरोप स्वीकार किए। उन्होंने बताया कि वे पहले मेडिकल कॉलेज के छात्र थे।

महंगी लाइफस्टाइल और ज्यादा पैसे की लालच में फर्जीवाड़ा करने लगे।2009 से लगातार लोगों को झूठे केस में फँसाने, एग्जाम फर्जीवाड़ा, नौकरी दिलाने और अधिकारी बनकर वसूली करने की वारदातें कर रहे थे।

आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड

1. चंद्रशेखर सेन उर्फ चंदन सेन (40 वर्ष)

निवासी: कनसिंधी, जिला गरियाबंद

अब तक दर्ज 8 मामले, जिनमें शामिल—

2013: PMT के नाम पर ₹19 लाख की ठगी, दुर्ग

2015: जुआ एक्ट मामला, छुरा

2016: नौकरी लगवाने के नाम पर ₹55 हजार की ठगी, गरियाबंद

2016: छात्रावास अधीक्षक बनाने के नाम पर ₹1.30 लाख ठगी

2021: स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ₹26.80 लाख की ठगी, रायपुर

2013: PMT पास कराने के नाम पर ₹3 लाख की ठगी, जगदलपुर

2. निखिल राज सिंह (37 वर्ष)

निवासी: झांसी, उत्तर प्रदेश

अब तक दर्ज मामले—

2009: PMT परीक्षा फर्जीवाड़ा, महासमुंद

2010: PMT परीक्षा धोखाधड़ी, बिलासपुर

2022: गुरुग्राम में लगभग ₹5 करोड़ की ठगी

पूरा बैकग्राउंड – कैसे बने ‘मुन्‍नाभाई MBBS’

दोनों आरोपी 2007 में PMT परीक्षा पास कर जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में मिले थे। यहीं से दोनों की दोस्ती और फिर धोखाधड़ी की कहानी शुरू हुई।

दोनों ने छात्रों को PMT एग्जाम फर्जी तरीके से पास कराने का धंधा शुरू किया—

असली अभ्यर्थी की जगह फर्जी उम्मीदवार बैठाकर परीक्षा दिलाना,

कोचिंग फीस और पास कराने के नाम पर लाखों की वसूली करना। 2009 और 2010 में PMT फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर दोनों जेल भी जा चुके हैं, लेकिन फिर भी ठगी का सिलसिला जारी रखा।

पुलिस के अनुसार

दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले कई सालों में करोड़ों रुपए ठग चुके हैं।

पैसे और शौक की वजह से लगातार अपराध करते रहे। अभी भी दोनों पढ़ाई कर रहे थे, पर पैसों के चक्कर में कई बार फेल हो चुके हैं।

 

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