देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों गंभीर परिचालन संकट से गुजर रही है। लगातार उड़ान रद्द होने, क्रू की कमी, और नए FDTL नियमों के अनुपालन में आई दिक्कतों के बीच DGCA ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया है। यह कदम उन निरीक्षकों की जिम्मेदारी तय करने के बाद उठाया गया, जिनकी निगरानी में सुरक्षा और ऑपरेशनल नियमों के पालन में गड़बड़ी सामने आई थी।
इधर, इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स को लगातार दूसरे दिन DGCA के सामने पेश होना पड़ा, जहाँ उनसे ऑपरेशंस, क्रू मैनेजमेंट, रिफंड, मुआवजा और शेड्यूलिंग से जुड़े सवाल पूछे गए। गुरुवार को दिल्ली और बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 200 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई थीं, जबकि आज अकेले बेंगलुरु से 54 उड़ानें रद्द की गईं। सिविल एविएशन मंत्रालय ने एयरलाइन को निर्देश दिया है कि वह अपने विंटर शेड्यूल में 10% कटौती करे।
कैप्टन गोपीनाथ का बयान—इंडिगो संकट ओवरकॉन्फिडेंस का नतीजा
कम किराए वाली उड़ान सेवा की शुरुआत भारत में करने वाले कैप्टन आर. गोपीनाथ ने इंडिगो संकट पर बड़ा बयान दिया। उनका कहना है कि एयरलाइन में “ओवरकॉन्फिडेंस और अहंकार” बढ़ जाने से हालात बिगड़े।
2003 में एयर डेक्कन स्थापित करने वाले गोपीनाथ ने कहा कि इंडिगो ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के दूसरे फेज को लागू करने की योजना ठीक से नहीं बनाई, जिसके कारण दिसंबर की शुरुआत में संकट गहराया। उनके अनुसार एयरलाइन के पास पर्याप्त संख्या में पायलट नहीं थे।
वे कहते हैं कि जब कंपनियाँ रेवेन्यू, प्रॉफिट और स्टॉक मार्केट पर अत्यधिक ध्यान देती हैं, तो वे पायलटों और ग्राउंड स्टाफ की वास्तविक समस्याएँ सुनना बंद कर देती हैं, और इंडिगो के साथ भी यही हुआ।
इंडिगो संकट की जड़ें – क्या गलत हुआ?
1. पायलटों की कमी और FDTL नियम
1 नवंबर से लागू नए FDTL नियमों के बाद पायलटों के आराम के समय में वृद्धि हुई, लेकिन इंडिगो पर्याप्त संख्या में पायलट उपलब्ध नहीं करा पाई। परिणामस्वरूप, उड़ान संचालन बाधित हुआ और रद्दीकरण तेजी से बढ़ा।
2. ओवरकॉन्फिडेंस और गलत प्राथमिकताएँ
कंपनी ने ऑपरेशन से ज्यादा ध्यान ग्रोथ और स्टॉक पर केंद्रित कर दिया। इससे पायलटों व क्रू की चिंताओं की अनदेखी हुई।
3. DGCA की निगरानी में खामी
एविएशन नियामक ने भी फ्लाइट संचालन संबंधी नियमों की मॉनिटरिंग में लापरवाही दिखाई। इसलिए DGCA ने अपने ही चार अधिकारियों को सस्पेंड किया है।
एयर डेक्कन और गोपीनाथ का संदर्भ
कैप्टन गोपीनाथ ने 2003 में भारत में पहली लो-कॉस्ट एयरलाइन एयर डेक्कन शुरू की थी, जिसने छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ा। वित्तीय दबाव के कारण इसे 2008 में विजय माल्या को बेचना पड़ा, जिसने इसे किंगफिशर नाम दिया। गोपीनाथ का कहना है कि इंडिगो भी उन्हीं गलतियों को दोहरा रही है, जिनसे एयर डेक्कन को नुकसान हुआ।
वर्तमान स्थिति—इंडिगो के लिए चुनौती भरा समय
लगातार उड़ान रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। DGCA की सख्ती, मंत्रालय के निर्देश और बढ़ते दबाव के बीच इंडिगो को अपने शेड्यूल, क्रू मैनेजमेंट और ऑपरेशन प्रक्रिया की पूरी तरह समीक्षा करनी होगी।
