छत्तीसगढ़ में कथित धर्म परिवर्तन के विरोध में बुलाए गए छत्तीसगढ़ बंद के दौरान प्रदेश के कई जिलों में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। बंद का असर राजधानी रायपुर समेत दुर्ग, जगदलपुर, अंबिकापुर, बिलासपुर और कांकेर जिलों में साफ तौर पर देखा गया। सुबह से ही बाजार, दुकानें, स्कूल और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि अस्पताल, मेडिकल स्टोर और इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं।
रायपुर में बंद के दौरान बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर लाठी-डंडे लेकर उतरे। इस दौरान ब्लिंकट कंपनी के कार्यालय में घुसकर कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई। एक कर्मचारी को लाठी से पीटने की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसके अलावा रायपुर के मैग्नेटो मॉल में भी हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जमकर तोड़फोड़ की, जिससे मॉल में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई, जहां कथित धर्म परिवर्तन के मामले को लेकर एक महिला के घर में तोड़फोड़ की गई। पीड़ित महिला का कहना है कि वह पिछले 5–6 वर्षों से ईसाई धर्म को मान रही है और दोबारा हिंदू धर्म में लौटने के लिए तैयार नहीं है। इसी बात को लेकर गांव में विवाद बढ़ा और हिंसा भड़क उठी।
बंद के दौरान हिंदू संगठनों के सदस्य चेंबर ऑफ कॉमर्स के साथ मिलकर दुकानों को बंद कराते नजर आए। लोगों से जबरन दुकानें बंद रखने की अपील की गई। इस बंद को RSS, छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स सहित कई व्यापारिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का समर्थन मिला। वहीं धमतरी जिले में प्रदर्शनकारियों ने शराब की दुकानों को भी बंद करा दिया।
कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ बंद के दौरान विरोध प्रदर्शन कई जगह हिंसक रूप में बदल गया। मारपीट, तोड़फोड़ और जबरन बंद कराने की घटनाओं ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती शांति व्यवस्था बनाए रखना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है।
