रायपुर: प्रदेश के नर्सिंग स्टाफ ने अपनी लंबित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कल से तीन दिवसीय आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। आंदोलन का असर राज्य के शासकीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में देखने को मिल सकता है। नर्सिंग संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि वे लंबे समय से वेतन विसंगति, पदोन्नति में देरी, रिक्त पदों पर भर्ती न होना, अतिरिक्त कार्यभार, जोखिम भत्ता और सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई अस्पतालों में निर्धारित संख्या से कम नर्सों के भरोसे मरीजों का इलाज कराया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आंदोलन के दौरान नर्सिंग कर्मचारी धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने और सांकेतिक विरोध जैसे कार्यक्रम करेंगे। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन सीमित स्टाफ के कारण ओपीडी, नियमित जांच, भर्ती और डिस्चार्ज प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मरीजों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं और आंदोलनकारियों से बातचीत के प्रयास भी जारी हैं। वहीं, आम लोगों को आशंका है कि यदि आंदोलन लंबा चला, तो इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है
