छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से सामने आई यह घटना राज्य की धान खरीदी व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। धान बिक्री के लिए टोकन न मिलने से परेशान एक किसान ने कीटनाशक का सेवन कर लिया, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है जिसमें किसान बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है।
जानकारी के अनुसार, किसान सुमेर सिंह गोंड के पास लगभग 3 एकड़ 75 डिसमिल भूमि है। इस वर्ष उन्होंने 68 क्विंटल से अधिक धान का उत्पादन किया, लेकिन टोकन न मिलने के कारण वे अपना धान बेच नहीं पा रहे थे। मोबाइल फोन न होने से ऑनलाइन प्रक्रिया में भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। समस्या के समाधान के लिए किसान ने पटवारी से लेकर तहसील कार्यालय और जनदर्शन तक कई जगह शिकायत की, लेकिन कहीं से कोई ठोस समाधान नहीं मिला।
लगातार उपेक्षा और आर्थिक दबाव के चलते किसान मानसिक रूप से टूट गया। रविवार देर रात उसने आत्महत्या की नीयत से कीटनाशक का सेवन कर लिया। परिजनों को जब घटना की जानकारी मिली तो वे तत्काल उसे स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। फिलहाल किसान का इलाज जारी है।
इस मामले ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। कोरबा से कांग्रेस सांसद ने घटना को सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि किसानों के हित में किए जा रहे दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। इससे पहले भी राज्य में इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो यह दर्शाती हैं कि धान खरीदी प्रणाली में सुधार की सख्त जरूरत है।
यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि यदि समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। किसान की मेहनत का सम्मान और उसे न्यायसंगत व्यवस्था देना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
