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June 4, 2026
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रायपुर रेलवे स्टेशन की पार्किंग बनी बोझ, शुल्क बढ़ा लेकिन सुविधाएं नदारद

रायपुर राजधानी के रेलवे स्टेशन पर वाहन खड़ा करना अब आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। स्टेशन परिसर की पार्किंग में कार खड़ी करने के लिए निर्धारित शुल्क में बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे यात्रियों और स्टेशन आने-जाने वाले लोगों पर सीधा आर्थिक दबाव पड़ा है। पहले जहां दो घंटे के लिए 30 रुपये देने पड़ते थे, अब वही शुल्क बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह पूरे दिन की पार्किंग का शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये कर दिया गया है।

पार्किंग शुल्क बढ़ने की सबसे बड़ी वजह स्टेशन पार्किंग के ठेके की राशि में भारी इजाफा बताया जा रहा है। इस वर्ष पार्किंग का ठेका 30 लाख रुपये के बजाय करीब एक करोड़ रुपये में दिया गया है। ठेके की रकम दोगुने से भी अधिक हो जाने के कारण उसका सीधा असर आम लोगों पर डाले गए पार्किंग शुल्क के रूप में देखने को मिल रहा है। स्टेशन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री निजी वाहनों से पहुंचते हैं, ऐसे में यह बढ़ोतरी हजारों लोगों की जेब पर असर डाल रही है।

स्टेशन में मुख्य पार्किंग के साथ-साथ प्रीमियम पार्किंग की भी व्यवस्था है, जहां एक साथ लगभग 120 कारें खड़ी की जा सकती हैं। प्रीमियम पार्किंग में सामान्य पार्किंग की तुलना में अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। रोजाना स्टेशन से लगभग 120 ट्रेनों का आवागमन होता है और करीब 70 हजार से अधिक लोग स्टेशन आते-जाते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग अपनी निजी गाड़ियों से स्टेशन पहुंचते हैं, जिससे पार्किंग की मांग हमेशा बनी रहती है।

हालांकि शुल्क बढ़ाने के बावजूद पार्किंग में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है। टेंडर शर्तों के अनुसार पार्किंग स्थल पर वाहनों में हवा भरने की सुविधा, फ्लोरिंग, पीने के पानी और शेड की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

स्टेशन पार्किंग को लेकर पहले भी कई प्रयोग किए गए, लेकिन वे सभी विफल साबित हुए। पिछले वर्ष एयरपोर्ट की तर्ज पर पिक-अप और ड्रॉप सिस्टम लागू किया गया था, जिसे विवादों के बाद बंद करना पड़ा। इसके अलावा पार्किंग पर्ची को लेकर भी लगातार विवाद होते रहे हैं। कंप्यूटराइज्ड पर्ची के बजाय अब भी कई बार हाथ से लिखी पर्ची दी जाती है और तय शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने के आरोप लगते रहे हैं।

पार्किंग में वाहन खड़ा करने के दौरान चोरी या नुकसान की स्थिति में ठेका लेने वाले जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं और यात्रियों को रेलवे पुलिस के पास भेज दिया जाता है। इससे आम लोगों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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