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September 7, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

‘भारतमाला’ में भूमि मुआवजा घोटाला: रिकॉर्ड में हेराफेरी कर सरकारी ज़मीन से बनाया 40 करोड़ का खेल

रायपुर: भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में एक संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें पटवारियों, भू-माफियाओं और कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से सरकारी जमीन को निजी भूमि के रूप में दर्ज कर करोड़ों रुपये का फर्जी मुआवजा हासिल किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से रचा गया, जिसमें राजस्व रिकॉर्ड को आधार बनाकर कागजों पर जमीन की पहचान ही बदल दी गई।

जांच में सामने आया है कि सरकारी स्वामित्व वाली जमीनों को निजी नामों पर दर्ज दिखाकर भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसके बाद उन जमीनों पर बाजार मूल्य से कई गुना अधिक मुआवजा तय कराया गया। शुरुआती आकलन के मुताबिक इस घोटाले में करीब 40 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय गड़बड़ी की गई है।

सूत्रों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में पटवारियों की भूमिका सबसे अहम रही, क्योंकि जमीन से जुड़े मूल दस्तावेज, खसरा-खतौनी और रिकॉर्ड अपडेट की जिम्मेदारी उन्हीं के पास होती है। भू-माफियाओं ने इसी तंत्र का इस्तेमाल कर सरकारी संपत्ति को निजी संपत्ति में बदलने का खेल खेला और फिर मुआवजे के रूप में मोटी रकम निकाल ली।

अब जांच एजेंसियां दस्तावेजों की परत-दर-परत जांच कर रही हैं। जमीन रिकॉर्ड, बैंक खातों, ट्रांजैक्शन डिटेल और डिजिटल डाटा को खंगाला जा रहा है, ताकि पूरे घोटाले की कड़ी को जोड़ा जा सके। प्रशासन का कहना है कि मामले में शामिल सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सरकारी धन की रिकवरी के लिए भी कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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