टी20 वर्ल्ड कप 2026 में मेजबान श्रीलंका के लिए बीती रात किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। घरेलू सरजमीं पर खिताब जीतने के बड़े सपने के साथ उतरी टीम को पाकिस्तान के खिलाफ सुपर-8 के निर्णायक मुकाबले में 5 रनों से हार का सामना करना पड़ा। यह हार केवल एक मैच की शिकस्त नहीं थी, बल्कि इसके साथ ही श्रीलंका का सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना भी चकनाचूर हो गया। स्टेडियम में मौजूद हजारों प्रशंसक स्तब्ध रह गए और पूरे देश में मायूसी का माहौल छा गया।
इस हार का सबसे बड़ा असर टीम के कोचिंग ढांचे पर पड़ा। टीम के हेड कोच और श्रीलंका के दिग्गज क्रिकेटर सनथ जयसूर्या ने मैच के कुछ घंटों के भीतर ही अपने पद से हटने का फैसला कर लिया। हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंपने की प्रक्रिया पूरी नहीं की है, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके बयान ने संकेत दे दिए कि यह उनका आखिरी असाइनमेंट था। जयसूर्या ने कहा कि उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि यह विश्व कप उनके कोचिंग करियर का अंतिम अध्याय होगा।
श्रीलंका ने पूरे टूर्नामेंट में संघर्ष जरूर दिखाया, लेकिन अहम मौकों पर टीम दबाव में बिखरती नजर आई। पाकिस्तान के खिलाफ भी लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम ने आखिरी ओवर तक मुकाबला जीवंत रखा, लेकिन जीत से चूक गई। बल्लेबाजी क्रम की अस्थिरता और मध्यक्रम की विफलता टीम के लिए घातक साबित हुई। गेंदबाजों ने संतुलित प्रदर्शन किया, परंतु निर्णायक क्षणों में चूक भारी पड़ गई।
इस अप्रत्याशित हार के बाद श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) पर भी सवाल उठने लगे हैं। चयन प्रक्रिया, रणनीति और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को लेकर आलोचना तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब टीम को नए सिरे से पुनर्गठन की जरूरत है, ताकि भविष्य की चुनौतियों के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।
कुल मिलाकर, टी20 वर्ल्ड कप 2026 श्रीलंका के लिए उम्मीदों और निराशाओं का मिश्रण बनकर रह गया। मेजबानी का गौरव तो मिला, लेकिन खिताब की दौड़ से समय से पहले बाहर होना देश के क्रिकेट इतिहास में एक कड़वे अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में श्रीलंका क्रिकेट किस दिशा में कदम बढ़ाता है।
