छत्तीसगढ़ अब हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार के नेतृत्व में जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश और योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। हाल ही में राजधानी रायपुर में आयोजित बायोफ्यूल एंड बायो एनर्जी एक्सपो और सेमिनार में राज्य के बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) द्वारा यह जानकारी दी गई कि प्रदेश में जैव ईंधन उत्पादन के लिए लगभग 3,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
सीबीडीए के सीईओ सुमित सरकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024–2030 के तहत निजी कंपनियों जैसे गेल, बीपीसीएल और ONGC ग्रीन ने विभिन्न जिलों में बायोफ्यूल उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें एमएसडब्ल्यू/बायोमास आधारित संपीडित बायोगैस संयंत्र शामिल हैं। इससे न केवल प्रदेश में हरित ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा बल्कि हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को बायोफ्यूल के क्षेत्र में देश का लीडिंग स्टेट बनाना है। इस दिशा में 2024–29 के रोडमैप विजन पर तेजी से कार्य हो रहा है। बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के अनुसार, इन योजनाओं से पर्यावरणीय प्रदूषण में कमी आने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि किसानों से कृषि अपशिष्ट (Agricultural Waste) और बायोमास खरीदा जाएगा।
राजधानी रायपुर में आयोजित इस एक्सपो में उद्योग, ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और बायोफ्यूल तकनीक, निवेश के अवसर तथा ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर विचार-विमर्श किया। आयोजन स्थल श्रीराम बिजनेस पार्क में तीन दिनों तक चले इस एक्सपो में विभिन्न कंपनियों ने अपनी बायोफ्यूल तकनीक और प्रोजेक्ट योजनाओं का प्रदर्शन भी किया।
कुल मिलाकर, यह पहल छत्तीसगढ़ को न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह प्रदेश के आर्थिक और पर्यावरणीय विकास का भी मजबूत आधार बनेगी। आने वाले वर्षों में बायोफ्यूल उत्पादन से राज्य में ग्रीन एनर्जी रिवॉल्यूशन की शुरुआत होने की उम्मीद है।
