छत्तीसगढ़ बस्तर अंचल में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को उस समय बड़ा झटका लगा, जब हिड़मा के सबसे करीबी सहयोगी और बटालियन नंबर-1 के कमांडर देवा बारसे (49) ने तेलंगाना के हैदराबाद में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वर्षों तक नक्सली गतिविधियों का संचालन करने वाला देवा, गुरिल्ला आर्मी के शीर्ष कमांडरों में गिना जाता रहा है। बताया जा रहा है कि वह अपने साथ 19 अन्य साथियों के साथ तेलंगाना पहुंचा और पूरी प्रक्रिया के तहत सरेंडर किया।
आत्मसमर्पण के दौरान देवा के पास से अत्याधुनिक विदेशी हथियार बरामद हुए, जिनमें इजराइल में बनी ‘तावोर’ असॉल्ट राइफल और अमेरिकी ‘कोल्ट M4’ शामिल हैं। इसके अलावा उसने करीब 20 लाख 30 हजार रुपये नकद भी पुलिस को सौंपे। इन हथियारों की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि नक्सलियों का अंतरराष्ट्रीय हथियार सप्लाई नेटवर्क अब भी सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि तावोर जैसी राइफलें भारत में आमतौर पर सेना और केंद्रीय बलों के पास ही होती हैं, ऐसे में नक्सलियों तक इनका पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के मुताबिक, हिड़मा के साथ हुए मुठभेड़ के बाद देवा ने संगठन छोड़ने का मन बना लिया था। उसने नवंबर महीने में ही आत्मसमर्पण का संदेश भिजवा दिया था। इसके लिए सुकमा जिले में एक ‘ग्रीन कॉरिडोर’ भी तैयार किया गया, ताकि वह सुरक्षित तरीके से बाहर आ सके। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति को इस सरेंडर का अहम कारण माना जा रहा है।
तेलंगाना के डीजीपी ने इसे सुरक्षा बलों की रणनीति और सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति की बड़ी सफलता बताया है। साथ ही शेष बचे नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की गई है। देवा बारसे का आत्मसमर्पण यह साफ संकेत देता है कि बस्तर में माओवाद की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, हालांकि हथियारों की आपूर्ति और नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए अब भी सतर्कता जरूरी है।
