छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सड़क सुरक्षा माह के दौरान सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तीखी बहस का विषय बना हुआ है। वीडियो में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बिना हेलमेट बाइक चलाते हुए नजर आ रहे हैं। यही नहीं, उनके साथ चल रहे अन्य लोग भी बिना हेलमेट दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो खुद मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों की प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
सड़क सुरक्षा माह के तहत पूरे जिले में पुलिस और प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। जगह-जगह हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर अभियान, कार्यशालाएं और चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जा रही है और हेलमेट को जीवन रक्षक सुरक्षा कवच के रूप में अपनाने की अपील की जा रही है। ऐसे माहौल में एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और मंत्री का स्वयं नियमों का उल्लंघन करना जनता को खटकता नजर आया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मामले को दोहरे मापदंड (डबल स्टैंडर्ड) से जोड़ते हुए सवाल उठाए। कई यूजर्स ने लिखा कि आम नागरिक बिना हेलमेट पकड़े जाने पर तुरंत चालान कटवा लेते हैं, जबकि जनप्रतिनिधियों पर नियम लागू नहीं होते। कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है और नेता-जनप्रतिनिधि इससे ऊपर हैं? वहीं कई यूजर्स ने यह भी कहा कि मंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति समाज के लिए आदर्श होते हैं और उनसे अपेक्षा होती है कि वे नियमों का पालन कर उदाहरण पेश करें।
यह मामला केवल एक व्यक्ति के बिना हेलमेट बाइक चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में बैठे लोगों की जिम्मेदारी, कानून की समानता और सामाजिक संदेश से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जब प्रशासन एक ओर सड़क सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की लापरवाही पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।
