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June 5, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

शांति सरोवर में ‘ब्रह्मा भोजन’ कार्यक्रम: मुख्यमंत्री साय बोले—आध्यात्मिक ऊर्जा से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव

नया रायपुर स्थित शांति सरोवर परिसर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘स्नेह मिलन एवं ब्रह्मा भोजन’ कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। यह आयोजन छत्तीसगढ़ विधानसभा के सम्मानित सदस्यों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था, जिसमें कैबिनेट मंत्रिमंडल, नेता प्रतिपक्ष और कई विधायक भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मीयता से ओत-प्रोत रहा। मुख्यमंत्री ने ब्रह्माकुमारी बहनों के सेवा भाव, स्नेह और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रेम और आदर से सभी अभिभूत हैं। उन्होंने इसे एक सुंदर और प्रेरणादायी परंपरा बताया, जो हर वर्ष विधायकों को आध्यात्मिक चिंतन और आत्मिक शांति से जोड़ने का अवसर देती है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था समाज में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक जागरूकता और आंतरिक शांति के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि संस्था का 137 से अधिक देशों में विस्तार होना इसकी वैश्विक स्वीकार्यता और प्रभाव का प्रमाण है। शांति सरोवर और शांति शिखर जैसे आध्यात्मिक केंद्रों में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो व्यक्ति के जीवन में संतुलन और सुकून लाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अनेक जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता ला रहा है। विशेष रूप से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में संस्था की भूमिका उल्लेखनीय है। जनजातीय क्षेत्रों में भी सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों से स्थानीय समुदायों को व्यापक लाभ मिल रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ब्रह्माकुमारी बहनों के अतिथि बनकर पवित्र ब्रह्मा भोजन ग्रहण किया। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों और विधायकों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारी बहनों ने मुख्यमंत्री और सभी जनप्रतिनिधियों को माउंट आबू आने का आमंत्रण दिया, जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।

यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि आध्यात्मिक संवाद और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा, जिसने जनप्रतिनिधियों को सेवा, शांति और सकारात्मकता के संदेश से जोड़ने का कार्य किया।

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