राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) ने शुक्रवार को खडकवासला में अपनी 148वीं पासिंग आउट परेड में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने 300 से अधिक पुरुष कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर परेड में हिस्सा लिया और देश की सेवा के लिए तैयार होने का गौरव हासिल किया। यह भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक क्षण है।
हरसिमरन: हवलदार की बेटी बनी डिवीजन कैडेट कैप्टन
हरियाणा की हरसिमरन कौर ने परेड में डिवीजन कैडेट कैप्टन के रूप में सबका ध्यान खींचा। उनके पिता भारतीय सेना में हवलदार रहे, और दादाजी भी सैन्य पृष्ठभूमि से हैं। हरसिमरन ने कहा, “यह मेरे परिवार के लिए गर्व का पल है। NDA ने मुझे अनुशासन और नेतृत्व का असली मतलब सिखाया।”
इशिता: गैर-सैन्य परिवार से पहली फौजी
दूसरी ओर, इशिता शर्मा ने गैर-सैन्य परिवार से होने के बावजूद डिवीजन कैडेट कैप्टन का खिताब हासिल किया। अर्थशास्त्र की पढ़ाई छोड़कर NDA में शामिल होने वाली इशिता ने बताया, “यह प्रशिक्षण मेरे लिए जीवन बदलने वाला अनुभव था। मैं अपने देश की सेवा के लिए तैयार हूं।”
परेड में दिखा जोश और जज्बा
मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) ने परेड की समीक्षा की। कुल 339 कैडेट्स को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से बी.एससी., बी.ए., और बी.टेक. डिग्री दी गई। आर्ट्स स्ट्रीम में प्रथम स्थान हासिल करने वाली श्रीति दक्ष ने अपने पिता, विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) योगेश कुमार दक्ष की हंटर स्क्वाड्रन को चुना।
महिलाओं ने दिखाई बराबरी की ताकत
महिला कैडेट्स ने पुरुषों के समान कठिन प्रशिक्षण लिया, जिसमें परेड ड्रिल, घुड़सवारी, तैराकी और रणनीति अभ्यास शामिल थे। 2021 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2022 में NDA में महिलाओं का पहला बैच शामिल हुआ था, और अब ये कैडेट्स सेना, नौसेना और वायुसेना में अपनी सेवाएं देंगी।
NDA की नई उड़ान
यह परेड न केवल NDA के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बनी, बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय सेना में अब महिलाएं भी बराबरी का दम दिखा रही हैं। इन 17 महिला कैडेट्स ने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे देश को गर्व का मौका दिया है।
