गरियाबंद जिले के अमलीपदर ब्लॉक में घटी यह घटना पूरे स्वास्थ्य तंत्र और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है। 60 वर्षीय महिला इच्छाबाई पटेल का सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। लेकिन दुख की घड़ी में उनके परिजनों को मृतका का शव घर ले जाने में बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ा।
निधन के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से बार-बार एंबुलेंस की मांग की। लेकिन उनकी हर गुहार को अनसुना कर दिया गया। प्रशासन न केवल निष्क्रिय रहा, बल्कि मृतक परिवार को कोई सहारा भी नहीं दिया। मजबूर होकर परिजनों ने शव को खाट पर रखा और पैदल ही गांव तक ले गए। यह दृश्य अत्यंत पीड़ादायक और प्रशासन की संवेदनहीनता का प्रमाण है।
निजी वाहनों का सहारा लेने की कोशिश भी कारगर नहीं हुई। ड्राइवरों ने या तो ऊंची रकम की मांग कर दी या शव ढोने से साफ इनकार कर दिया। इस स्थिति ने परिजनों की पीड़ा को और भी बढ़ा दिया। अंततः खाट ही उनकी एंबुलेंस बन गई।
यह घटना सवाल उठाती है कि जब सरकारी अस्पतालों में एंबुलेंस जैसी मूलभूत सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं हो सकती, तो आम नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा कैसे करे? ऐसे मामलों से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता है।
