रायपुर. छत्तीसगढ़ में पटाखा और चिमनी विस्फोट का खतरा लगातार बढ़ रहा है। डिजास्टर मैनेजमेंट रिपोर्ट 2025 में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अलर्ट जारी किया गया है। रिपोर्ट में रायपुर, दुर्ग, भिलाई सहित 17 जिलों को “हाई रिस्क” श्रेणी में रखा गया है, जबकि 9 जिलों को “कम जोखिम” श्रेणी में बताया गया है।
क्यों बढ़ा खतरा?
- औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की कमी
- त्योहारों और गर्मी के मौसम में पटाखों का अत्यधिक उपयोग
- रासायनिक गोदामों और चिमनियों की नियमित जांच न होना
- कर्मचारियों की लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी
संभावित प्रभाव
- बड़ी संख्या में मानव हानि और घायल होने का खतरा
- फैक्ट्रियों और गोदामों में संपत्ति व ढांचे का नुकसान
- अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर अचानक दबाव
- धुआं और गैस निकलने से वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी
रिपोर्ट के सुझाव
- सभी पटाखा गोदामों और चिमनी यूनिट्स का सेफ्टी ऑडिट
- हर जिले में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम तैनात करना
- पटाखा भंडारण व बिक्री पर सख्त नियम और लाइसेंसिंग
- जन-जागरूकता अभियान चलाना और स्कूल-कॉलेज में प्रशिक्षण
- नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना
हाई रिस्क जिले
रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, भाटापारा, जांजगीर-चांपा, महासमुंद, बालोद, राजनांदगांव, कवर्धा, सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, बेमेतरा और बलौदा बाजार।
कम जोखिम जिले
कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, गरियाबंद, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।
रिपोर्ट ने साफ कहा है कि “कम जोखिम का मतलब यह नहीं कि खतरा शून्य है।” हर जिले को सुरक्षा मानकों का पालन करना
