दिल्ली के इंडिया गेट पर रविवार शाम प्रदूषण के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में अचानक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने नक्सली कमांडर माडवी हिड़मा के समर्थन में पोस्टर दिखाए और नारे लगाए। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया।
वीडियो में एक प्रदर्शनकारी हिड़मा का स्केच वाला पोस्टर पकड़े दिखा, जबकि भीड़ के बीच “कितने हिड़मा मारोगे”, “हर घर से निकलेगा हिड़मा” और “अमर रहे हिड़मा” जैसे नारे सुनाई दिए। हिड़मा कुछ दिन पहले आंध्र प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने ट्रैफिक रोकने की कोशिश की और जब पुलिस टीम उन्हें हटाने पहुंची तो कुछ लोगों ने पेपर स्प्रे का इस्तेमाल भी किया। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया।
कर्तव्यपथ और संसद मार्ग थानों में हिंसा व अवैध विरोध से जुड़े आरोपों में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गईं। गिरफ्तार व्यक्तियों पर IPC की धारा 74, 79, 105(2), 132, 221, 223 और 6(2) सहित कई धाराएं लगाई गईं। दूसरी FIR में IPC 223A, 132, 221, 121A, 126(2) व 3(5) की धाराएं शामिल हैं।
दिल्ली के विकास मंत्री कपिल मिश्रा ने इस घटना को “प्रदूषण आंदोलन के नाम पर नक्सल विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश” बताया। प्रदर्शन आयोजकों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि आंदोलन केवल दिल्ली की जहरीली हवा के खिलाफ था और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित विवाद बनाया गया।
प्रदर्शन ‘दिल्ली कोऑर्डिनेशन कमेटी फ़ॉर क्लीन एयर’ द्वारा आयोजित किया गया था, जो सरकार की प्रदूषण से निपटने की ‘कॉस्मेटिक पहल’ जैसे कृत्रिम बारिश, पानी छिड़काव आदि की आलोचना कर रहा है। समूह का कहना है कि सरकार की नीतियाँ—जंगलों की कटाई, खनन और अवैध विस्तार—देश में प्रदूषण और चरम मौसम को बढ़ा रही हैं।
यह इस महीने का दूसरा बड़ा प्रदूषण विरोध प्रदर्शन था। इससे पहले 8 नवंबर को भी कई संगठनों और विपक्षी दलों ने इंडिया गेट तक मार्च निकाला था।
सोमवार को भी दिल्ली का AQI 397 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के बेहद करीब है। इस विवाद ने प्रदूषण मुद्दे के साथ-साथ राजनीतिक माहौल को भी और तनावपूर्ण बना दिया है।
