July 21, 2026
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114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को हरी झंडी

भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित सौदे की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह सौदा ऐसे समय आगे बढ़ा है जब भारतीय वायुसेना अपनी स्क्वॉड्रन क्षमता बढ़ाने और आधुनिक लड़ाकू प्लेटफॉर्म से लैस होने पर जोर दे रही है।

भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2025 में रक्षा मंत्रालय को 114 अतिरिक्त राफेल जेट की मांग भेजी थी। वर्तमान में वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल विमान सेवा में हैं, जबकि नौसेना ने 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। अंबाला एयरबेस पर राफेल का ट्रेनिंग और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर पहले से संचालित है, जिससे नए विमानों को शामिल करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध माना जा रहा है। वायुसेना के पास दो स्क्वॉड्रन (करीब 36–38 विमान) को तुरंत शामिल करने की क्षमता भी बताई गई है।

राफेल प्लेटफॉर्म अपनी बहु-भूमिका क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों के लिए जाना जाता है। इसमें स्कैल्प (Scalp) क्रूज मिसाइल, मेटेओर (Meteor) एयर-टू-एयर मिसाइल, लेजर गाइडेड बम (LGB), नॉन-गाइडेड क्लासिकल बम (NCB) और हैमर (HAMMER) जैसे GPS आधारित स्मार्ट बम शामिल हैं, जो लंबी दूरी और सटीक प्रहार की क्षमता प्रदान करते हैं।

यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें दसॉ (Dassault) एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर विमानों का निर्माण करेगी। दसॉ ने दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में अपनी हिस्सेदारी 49% से बढ़ाकर 51% कर ली है। इस संयुक्त उद्यम में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर भी भागीदार है। योजना के अनुसार 114 राफेल जेट में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद का इंटीग्रेशन किया जाएगा, साथ ही सुरक्षित डेटा लिंक की सुविधा दी जाएगी ताकि विमान भारतीय रडार और सेंसर सिस्टम से जुड़ सकें।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) इस डील का अहम हिस्सा है। इंजन निर्माता सफरान (Safran) और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स (Thales) भी इस प्रक्रिया में शामिल होंगी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पूरा होने के बाद इन विमानों में स्वदेशी कंटेंट 55 से 60 प्रतिशत तक होने की उम्मीद जताई गई है, जो घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को बढ़ावा देगा।

प्रस्ताव को पहले 16 जनवरी को रक्षा खरीद बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी थी और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाना है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17–20 फरवरी के भारत दौरे के दौरान इस सौदे को अंतिम रूप मिलने की संभावना जताई गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार नए राफेल विमानों की खरीद से एयर डिफेंस और सीमावर्ती इलाकों में तैनाती की क्षमता मजबूत होगी।

केंद्रीय बजट 2026–27 में रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो कुल बजट का 14.67% है। आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित 2.19 लाख करोड़ रुपये में से 1.85 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खरीद के लिए तय किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 24% अधिक है। रक्षा बजट के खर्च का ब्योरा देखें तो 27.95% पूंजीगत खर्च नए हथियार, विमान, टैंक और जहाजों की खरीद पर, 20.17% राजस्व खर्च संचालन और रखरखाव पर, 26.40% वेतन और भत्तों पर, 21.84% रक्षा पेंशन पर और 3.64% सिविल संगठनों पर निर्धारित है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कॉम्बैट मिसाइलों और एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड सूडो सैटेलाइट्स के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। इन सभी सौदों की कुल कीमत लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।

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