छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 23 फरवरी से शुरू होने जा रहे विधानसभा बजट सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार का सत्र कई मायनों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही पूरी तैयारी के साथ सदन में उतरने वाले हैं। विधायकों द्वारा अब तक 1034 से अधिक प्रश्न लगाए जा चुके हैं, जो यह संकेत देते हैं कि इस सत्र में विभिन्न मुद्दों पर लंबी और गंभीर चर्चा देखने को मिल सकती है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अधिकांश प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत किए गए हैं और संबंधित विभागों को जवाब तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि सदन में तथ्यात्मक और विस्तृत जानकारी रखी जा सके।
विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह सरकार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना चुका है। खास तौर पर धान खरीदी व्यवस्था, कानून-व्यवस्था की स्थिति और नई सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर सरकार से जवाब मांगे जाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि कई योजनाएं धरातल पर अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा पा रही हैं, वहीं सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जाने की तैयारी है। इससे साफ है कि सदन में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिल सकता है।
इस बजट सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिन 27 फरवरी हो सकता है, जब नए वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बजट में सरकार की प्राथमिकताएं, विकास कार्यों की दिशा, सामाजिक कल्याण योजनाएं और बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े ऐलान शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट आगामी समय की नीतियों और योजनाओं की रूपरेखा तय करेगा। कुल मिलाकर यह बजट सत्र प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दिशा दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है, जहां जनता से जुड़े मुद्दे केंद्र में रहेंगे और सरकार के कामकाज की व्यापक समीक्षा होगी।
