September 5, 2026
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हर फैसले को सरकार-विरोधी बताना गलत, न्यायपालिका मेरिट पर ही काम करती है – CJI गवई का बड़ा बयान

सेवानिवृत्त होते समय भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने न्यायपालिका को लेकर समाज में बन रहे नैरेटिव पर कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यह मानना बिल्कुल गलत है कि कोई जज तभी स्वतंत्र है, जब वह हर निर्णय सरकार के खिलाफ दे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अदालत हर केस को एक समान नजरिए से देखती है और फैसला केवल कानूनी मेरिट पर आधारित होता है—यह नहीं देखा जाता कि मामला सरकार का है या किसी निजी पक्ष का।

CJI गवई ने कोलेजियम की कार्यप्रणाली पर उठ रही चर्चाओं का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कोलेजियम के भीतर असहमति कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन इसे सार्वजनिक मंच पर लाना गलत धारणा बनाता है और जनमत को गलत दिशा दे सकता है। उन्होंने जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की असहमति पर कहा कि यदि उनकी राय मेरिट पर आधारित होती तो बाकी चार जज भी सहमत होते। इसलिए प्रश्न उठता है कि वह असहमति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

उन्होंने यह भी अफसोस जताया कि अपने कार्यकाल के दौरान वह किसी महिला जज की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति सुनिश्चित नहीं कर पाए। साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि रिटायरमेंट के बाद वह न तो किसी सरकारी पद को स्वीकार करेंगे और न ही राज्यपाल जैसी कोई भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि अब वे अपने गृह ज़िले में आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए काम करेंगे।

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