देश के अलग–अलग हिस्सों में एक ही दिन में सामने आई बम धमकियों और संदिग्ध गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया। गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में अदालतों और रेल यातायात से जुड़ी धमकियों के बाद व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया, वहीं केरल के कन्नूर जिले में विस्फोटक सामग्री की बड़ी बरामदगी हुई है।
कर्नाटक के मैसूरु जिला न्यायालय को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने पर एहतियातन कोर्ट परिसर को तुरंत खाली कराया गया। न्यायिक अधिकारी, वकील, वादकारी और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिसके चलते अदालत की सभी कार्यवाहियां अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गईं। बम निरोधक दस्ता और पुलिस ने परिसर की सघन तलाशी ली, हालांकि जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस अब धमकी भरे ई-मेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी है।
इसी तरह गुजरात में हाईकोर्ट सहित छह अदालतों को आरडीएक्स से उड़ाने की धमकी का ई-मेल मिला। अहमदाबाद, राजकोट, सूरत और भरूच की अदालतों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। सुबह कर्मचारियों द्वारा ई-मेल देखे जाने के बाद पुलिस को सूचना दी गई और बम स्क्वॉड ने जांच की, लेकिन कहीं भी विस्फोटक नहीं मिला। प्रारंभिक जांच में धमकी के पीछे एक उग्र संगठन के नाम का उल्लेख सामने आया है, जिसकी सत्यता की पुष्टि की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में मऊ रेलवे जंक्शन पर काशी एक्सप्रेस (15018) में बम होने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। पुलिस कंट्रोल रूम को मिली कॉल के बाद ट्रेन को स्टेशन पर रोका गया और यात्रियों को सुरक्षित उतारकर हर कोच की बारीकी से तलाशी ली गई। बम स्क्वॉड की जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और बाद में ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया।
उधर केरल के कन्नूर जिले में पुलिस ने दो अलग-अलग स्थानों से कुल 12 देसी विस्फोटक उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, आठ देसी बम एक स्कूल ग्राउंड में तिरपाल शीटों के बीच छिपाकर रखे गए थे, जबकि चार स्टील के विस्फोटक उपकरण एक सुनसान इलाके में एक बैग के भीतर मिले। मौके से एक धारदार हथियार भी बरामद हुआ है। पुलिस यह जांच कर रही है कि दोनों स्थानों से मिली विस्फोटक सामग्री का आपस में कोई संबंध है या नहीं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सभी मामलों में एहतियाती कदमों के चलते किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, एक के बाद एक आई धमकियों ने कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां धमकी भरे संदेशों के स्रोत, मंशा और संभावित नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
