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June 5, 2026
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भोपाल AIIMS में डॉक्टरों का पलायन: 2 साल में 27 ने छोड़ा, बाबूगिरी और भ्रष्टाचार के आरोप

भोपाल: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल, जो कभी मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का गौरव माना जाता था, आज अपने ही डॉक्टरों के पलायन से चर्चा में है। दैनिक भास्कर की विशेष खबर के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में 27 डॉक्टरों ने इस प्रतिष्ठित संस्थान को अलविदा कह दिया। डॉक्टरों का कहना है कि संस्थान में नौकरशाही का बोलबाला है, जिसके चलते मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही, प्रबंधन पर भ्रष्टाचार और तानाशाही के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।

क्या है डॉक्टरों की शिकायत?

डॉक्टरों का कहना है कि AIIMS भोपाल में प्रशासनिक हस्तक्षेप और “बाबूगिरी” ने उनकी स्वायत्तता छीन ली है। एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यहां इलाज से ज्यादा कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ता है। प्रबंधन का रवैया तानाशाही भरा है, और भ्रष्टाचार ने हालात को और बिगाड़ दिया।” कई डॉक्टरों ने बताया कि कामकाजी माहौल इतना खराब हो चुका है कि वे दूसरी जगहों पर बेहतर अवसर तलाश रहे हैं।

प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोप

डॉक्टरों ने प्रबंधन पर अनुचित खरीद-फरोख्त, संसाधनों के दुरुपयोग और पक्षपात के आरोप लगाए हैं। कुछ ने बताया कि जरूरी चिकित्सा उपकरणों की कमी और अनावश्यक प्रशासनिक नियमों ने मरीजों की देखभाल को और मुश्किल बना दिया है। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, “हम मरीजों को बेहतर इलाज देना चाहते हैं, लेकिन सिस्टम ही बाधा बन रहा है।”

मरीजों पर पड़ रहा असर

डॉक्टरों के पलायन का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। भोपाल AIIMS में मरीजों को लंबी वेटिंग लिस्ट और अपॉइंटमेंट में देरी का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल शिक्षा और शोध पर भी इसका नकार ात्मक प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि अनुभवी डॉक्टरों की कमी से प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष

AIIMS प्रबंधन ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन इन शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है और स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।

यह स्थिति न केवल भोपाल AIIMS बल्कि देश के अन्य सरकारी मेडिकल संस्थानों के लिए भी एक चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नौकरशाही को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण देने की जरूरत है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह पलायन और बढ़ सकता है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ेगा।

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